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भारतीय नववर्ष वैज्ञानिक धार्मिक आध्यात्मिक सांस्कृतिक व स्वस्थ्य के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण नववर्ष :- योगाचार्य महेश पाल

भारतीय नववर्ष वैज्ञानिक धार्मिक आध्यात्मिक  सांस्कृतिक व स्वस्थ्य के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण नववर्ष :- योगाचार्य महेश पाल 


हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है इस साल हम 30 मार्च को चेत्र माह शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को 2082वा विक्रम संवत् मनाने जा रहे हैं, योगाचार्य महेश पाल बताते हैं कि भारतीय संस्कृति व धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान ब्रह्मा ने इसी दिन से सृष्टि की रचना की शुरुआत की थी इसी दिन से विक्रम संवत के नए साल की शुरुआत होती है,यह दिन नवीनीकरण का प्रतीक है।, बुराई पर अच्छाई की जीत, जीवन में एक नया अध्याय शुरू करने,धार्मिक, आध्यात्मिक वैज्ञानिक सांस्कृतिक और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से हिंदू नव वर्ष का अलग ही महत्व है,विक्रम संवत के अंग्रेजी कैलेंडर से 57 साल आगे रहने का कारण है कि विक्रम संवत की शुरुआत राजा विक्रमादित्य ने किया था. राजा विक्रमादित्य विक्रम संवत के शुरू होने के साथ ही अपने साम्राज्य की जनता के सारे कर्जों का माफ कर उन्हें राहत प्रदान करते थे. विक्रम संवत हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू हो जाती है. इस संवत को गणितीय नजरिए से एकदम सटीक काल गणना माना जाता है. विक्रम संवत को राष्ट्रीय संवत माना गया है.विक्रम संवत को भारत के अलग अलग राज्यों कई नामो से जाना जाता है मध्य प्रदेश महाराष्ट्र में इसे 'गुड़ी पड़वा' के नाम से  कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में इसे 'उगादी' के नाम से  तमिलनाडु में इसे 'पुथंडू' ,पंजाब में इसे 'बैसाखी'आदि नामों से जाना जाता जाता है, प्राचीनकाल से ही यह परंपरा है कि हिंदू नव वर्ष पर पुराने कामकाज को समेटकर नए कामकाज की रूपरेखा तय की जाती रही है, क्योंकि यह माह वसंत के आगम का माह और इस माह से ही प्रकृति फिर से नई होने लगती है।आज भी भारत में चैत्र माह में बहिखाते नए किए जाते हैं। दुनिया के अन्य देशों में भी इसी माह में यह कार्य होता आ रहा है, सात दिन और 12 माह का प्रचलन इसी कैलेंडर से 12 माह और 7 दिवस बने हैं। 12 माह का एक वर्ष और 7 दिन का एक सप्ताह रखने का प्रचलन विक्रम संवत से ही शुरू हुआ। महीने का हिसाब सूर्य व चंद्रमा की गति पर रखा जाता है। विक्रम कैलेंडर की इस धारणा को यूनानियों के माध्यम से अरब और अंग्रेजों ने अपनाया। बाद में भारत के अन्य प्रांतों ने अपने-अपने कैलेंडर इसी के आधार पर विकसित किये,मार्च में प्रकृति और धरती का एक चक्र पूरा होता है। जनवरी में प्रकृति का चक्र पूरा नहीं होता। धरती के अपनी धूरी पर घुमने और धरती के सूर्य का एक चक्कर लगाने लेने के बाद जब दूसरा चक्र प्रारंभ होता है असल में वही नववर्ष होता है। नववर्ष में नए सिरे से प्रकृति में जीवन की शुरुआत होती है। वसंत की बहार आती है। चैत्र माह अंग्रेजी कैलेंडर के मार्च और अप्रैल के मध्य होता है। 21 मार्च को पृथ्वी सूर्य का एक चक्कर पूरा कर लेती है, ‍उस वक्त दिन और रात बराबर होते हैं। वैज्ञानिक कहते हैं कि इसी दिन से धरती प्राकृतिक नववर्ष प्रारंभ होता है। हिन्दू कैलेंडर सौरमास, नक्षत्रमास, सावन माह और चंद्रमास पर आधारित है। मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क आदि सौरवर्ष के माह हैं। यह 365 दिनों का है। चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ आदि चंद्रवर्ष के माह हैं। चंद्र वर्ष 354 दिनों का होता है, जो चैत्र माह से शुरू होता है। सौरमास 365 दिन का और चंद्रमास 355 दिन का होने से प्रतिवर्ष 10 दिन का अंतर आ जाता है। इस नव वर्ष का वैज्ञानिक महत्व चंद्र-सौर कैलेंडर पर आधारित है, जो मानव शरीर और प्रकृति के साथ तालमेल को दर्शाता है।हिंदू नववर्ष चंद्र-सौर कैलेंडर पर आधारित है, जो पृथ्वी के सूर्य के चारों ओर और चंद्रमा के पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाने पर आधारित यह कैलेंडर प्रकृति के चक्रों के साथ तालमेल में है, जैसे कि ऋतु परिवर्तन और दिन-रात की अवधि चंद्र-सौर कैलेंडर मानव शरीर की संरचना से भी जुड़ा है, क्योंकि चंद्रमा के चरणों का मानव शरीर पर प्रभाव पड़ता है, भारतीय कैलेंडर वैज्ञानिक रूप से काल गणना के आधार पर बनाया गया है, जो ग्रहों की चाल से जुड़ा है चैत्र माह में वसंत ऋतु का आगमन होता है, जो प्रकृति में नए जीवन और ऊर्जा का प्रतीक है हिंदू धर्म ग्रंथो के अनुसार, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी, इसलिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है,नव वर्ष नई शुरुआत, नई ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक है,यह दिन भारतीय संस्कृति और सभ्यता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है हिंदू नव वर्ष स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है,जो सात्विक जीवनशैली, दैवीय गुणों को अपनाने और सकारात्मकता को बढ़ावा देने पर जोर देता है हिंदू नववर्ष के दौरान सात्विक भोजन को बढ़ावा दिया जाता है, जो शरीर और मन को शुद्ध करने में मदद करता है यह समय स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, जैसे कि नियमित व्यायाम, योग- प्राणायाम और ध्यान,के लिए प्रेरित करता है यह नव वर्ष आध्यात्मिक विकास के लिए भी एक अच्छा समय है, जो मन को शांत और सकारात्मक बनाता है, हिंदू नव वर्ष लोगों को आयुर्वेदिक सिद्धांतों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है,जो शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य पर जोर देता है, यह नव वर्ष जीवन में एक नई शुरुआत करने और सकारात्मक बदलाव लाने का एक अच्छा समय माना जाता है, भारतीय नव वर्ष प्रारंभ होने के समय मनुष्य के  वात पित्त कप संतुलित अवस्था में रहते हैं इस समय योग प्राणायाम का अभ्यास प्रारंभ करने से सर्वाधिक लाभ होता है शरीर की अग्नि सम होती है जिससे शरीर के अंदर के रोगों को जल्दी ठीक करने में मदद मिलती है और योग के द्वारा इस बसंत ऋतु के समय में हम आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर पाते हैं इस समय हमारा मन शांत और ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ने का अवसर प्राप्त होता है, योग के शास्त्रों के अनुसार योग अभ्यास करने का सबसे उत्तम समय यही माना जाता है जिससे स्वस्थ संबंधि  शारीरिक मानसिक व आध्यात्मिक लाभ  प्राप्त होते हैं,

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