आधुनिकता की दौड में पानी की कीमत को समझना होगा
आधुनिकता की दौड में पानी की कीमत को समझना होगा
आगरा -स्वाधीन पर्यावरण, षिक्षा प्रसार व सामाजिक कार्यकर्ता सुचेताहम्बीर सिंह द्वारा कुलदीपिका सिंह मैमोरियल पर्यावरण जागरुकता अभियान के तहत पर्यावरण की असंतुलित परिस्थितियों व पानी का संरक्षण करने के लिए विष्व जल दिवस 22 मार्च को षासकीय कम्पोजिट विद्यालय नगला रामबल आगरा उप्र में छात्रों को जल संरद्वाण जागरुकता संदेष में कहा कि आधुनिकता की दौड में पानी की बचत के लिऐ व्यक्ति को अपने हर पहलू जैसे एक पेज कागज की बर्वादी रोकना (5 लीटर पानी बचत), बिजली का संरक्षण करना (एक यूनिट बचत से करीब 60 लीटर पानी बचत), पैट्रोल-डीजल की बचत करना (1 लीटर पैट्रोल-डीजल की बचत से 7 से 17 लीटर पानी की बचत), अनाज व खाना की बर्वादी को रोकना (एक किलो अनाज की बचत से 2000 से 4000 लीटर पानी की बचत), हाथ धोना, टूथ ब्रुष करना, नहाना आदि पर पानी के संरक्षण के लिऐ ध्यान देने का समय है और एक किलो चौकलेट बनाने में करीब 17 हजार लीटर पानी की खपत होती है इसलिऐ सभी प्रकार से खाद्य पदार्थो की बर्वादी को रोकने के प्रयास करने होंगे तथा पानी की हर बूंद कीमती है इसके लिऐ बर्वाद होती पानी की हर बंूद को जीवन की तरह संभालने के प्रयास करने होंगे। जीवन को बचाने के लिऐ पानी का संरक्षण व संबर्धन बहुत जरुरी है। प्रदूशण के कारण अधिकांष नदी, तालाब व कहीं कहीं जमीन का पानी दूशित हो चुका है किसी किसी स्थान पर जल स्रोतों में रसायनिक कीटनाषक, नाईट्रेट, आर्सेनिक, यूरेनियम व अन्य भारी तत्व पाऐ जा रहे हैं जो बहुत ही घातक हैं जिसके कारण इनका पानी किसी भी उपयोग के लायक नही हैं और देष के हर हिस्से में लगातार जल स्तर भी गिरता जा रहा है। इसलिऐ पानी की पूर्ति के लिऐ हमें छोटे व बडे स्तर पर बारिस के पानी को तालाबों, आदि में संरक्षण और संग्रहित करने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग विधि को बढावा देना होगा। पानी की कमी विष्व में एक सामाजिक कलह का कारण बनेगी। देष में प्रति व्यक्ति प्रति बर्श स्वच्छ पानी की उप्लब्धता गिरकर करीब 1400 क्यूबिक मीटर प्रति बर्श रह गई है जिसके लगातार गिरने के आसार है। बढती जनसंख्या व ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव और असंतुलित तरीके से जमीन से पानी का दोहन पानी की कमी का कारण है।
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