Breaking News

भगवान भास्कर को अर्ध्य देकर हुआ नवसंवत्सर 2082 का स्वागत

भगवान भास्कर को अर्ध्य देकर हुआ नवसंवत्सर 2082 का स्वागत

2082 वर्ष पूर्व प्रजा का संपूर्ण कर्ज माफ करके ही चलाया था राजा विक्रमादित्य ने नव संवत्सर- कैलाश मंथन

भारतीय काल गणना से होता है विश्व की समय इकाई का निर्धारण-कैलाश मंथन*

घर-घर में घटस्थापना के साथ हुआ नवरात्रि का शुभारंभ*

घरों पर चिंतन मंच के तहत केसरिया ध्वज फहराये


गुना। अंचल में नव संवत्सर एवं चैत्र नवरात्र का शुभारंभ रविवार के दिन भगवान भास्कर को अर्ध्य देकर हुआ। इस दौरान विराट हिन्दू उत्सव समिति, अंतर्राष्ट्रीय पुष्टिमार्गीय वैष्णव परिषद, नारी शक्ति चिंतन मंच अंतर्राष्ट्रीय निशुल्क गीता प्रचार मिशन के कार्यकर्ताओं एवं मातृशक्ति द्वारा वृहद स्तर पर भगवान सूर्य नारायण की आराधना की गई। वहीं रविवार को सुबह शुभ मुर्हुत में घट कलश स्थापना हुई। विराट हिउस के तहत कलश स्थापना के साथ  नाम  जप, पाठ आदि किए गए। हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने बताया कि नवसंवत्सर के दिन गुडी पड़वा ही सृष्टि की उत्पत्ति का दिवस माना जाता है। इस दिन भगवान भास्कर की आराधना का विशेष महत्व है। श्री मंथन के मुताबिक इस अवसर पर जिला मुख्यालय से 65 किमी दूर घने जंगलों में स्थित मां निहाल देवी एवं 10 किमी दूर मां बीस भुजा देवी भवानी मंदिरों पर नवरात्र के पहले ही दिन श्रद्धालुओं की भारी उमड़ी। नौ दिनों तक यहां चलने वाले मेलों में सभी शक्तिपीठों पर पांच लाख से अधिक श्रद्धालु नवरात्रि के दौरान दर्शनार्थ पहुंचते हैं। विराट हिउस ने इन स्थलों पर एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था दुरूस्त करने की मांग की है। विराट हिन्दू उत्सव समिति के संस्थापक कैलाश मंथन ने नव संवत्सर पर चिंतन हाउस में आयोजित बौद्धिक कार्यक्रम में कहा भारतीय काल गणना से ही विश्व के सभी राष्ट्रों के कैलेण्डर एवं समय की इकाई निर्धारित होती है। विक्रम संवत पूर्णत वैज्ञानिक गणना पर आधारित है।  भारतीय काल पंचाग समय की सूक्ष्मतम प्रमाणिक इकाई की गणना का प्रतीक है। विश्व के सभी कैलेण्डर परिवर्तनशील हैं, लेकिन भारतीय विक्रम संवत की काल गणना में आज तक एक भी पल का अंतर नहीं आया है। सूर्योंदय से अस्त तक प्राकृतिक बदलाव, सूर्य-चंद्रग्रहण, नक्षत्रों की गतियों का विलक्षण समय निर्धारण इस पंचाग से होता है। अंतर्राष्ट्रीय पुष्टिमार्गीय परिषद के प्रांतीय प्रचार प्रमुख कैलाश मंथन ने बताया महाराजा विक्रमादित्य ने 2082 वर्ष पहले अवंतिका नगरी उज्जैन में प्रजा का ऋण माफ करते हुए अपने महान ज्योतिषियों से वैज्ञानिक काल निर्धारण करवाया। लाखों वर्ष पूर्व सृष्टि के निर्माण के बाद समय का फेरबदल होता रहा। त्रेता में राम संवत, द्वापर युग में युधिष्ठर संवत, कृष्ण संवत के बाद कलियुग में विक्रम संवत ही सर्वाधिक प्रमाणिक  माना गया है।*

प्राचीन स्थलों पर हुए विशेष कार्यक्रम*

विराट हिउस के तहत अंचल में केदारनाथ, बजरंगगढ़, मालपुर, हनुमान टेकरी सहित अनेकों प्रमुख धार्मिक स्थलों पर प्रात: कालीन बेला में सूर्याध्र्य देकर नवसंवत्सर महोत्सव मनायाा गया। वहीं अंचल के ग्रामीण क्षेत्रों सहित शहर में महिला मंडलों द्वारा सुंदरकांड, कीर्तन, सत्संग आदि के कार्यक्रम हुए। बमोरी क्षेत्र के धाननखेड़ी, लालोनी, कालोनी, पांचौरा, परवाह आदि क्षेत्रों में महिला सत्संग मंडलों द्वारा नवसंवतसर पर कलश यात्रा एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।*

श्रीमद् भगवद् गीता वितरण का 37वां दौर आरंभ*

हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने बताया कि नवसंवत से नि:शुल्क गीता जी का वितरण का दौर एवं शुभारंभ पूजा अर्चन के साथ हुआ। श्री मंथन ने वि.स. 2082 से श्रीमद् भगवद् गीता प्रचार अभियान के तहत नि:शुल्क गीता वितरण का 37 वां दौर शुरू किया। अब तक 36 हजार से अधिक गीताजी की प्रतियां चिंतन मंच संयोजक कैलाश मंथन द्वारा वितरित की जा चुकी हैं। इस अवसर श्री मंथन ने कहा कि नवसंवत्सर 2082सभी के जीवन में खुशियां लाए। सृष्टि के शुभारंभ के प्रथम दिवस को ही संवत्सर दिवस कहा जाता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही सत्ययुग का प्रारंभ हुआ था। इसी दिन प्रलयकाल में मत्स्यावतार का प्रार्दुभाव हुआ था। विक्रम संवत के महीनों के नाम आकाशीय नत्रक्षों के उदय अस्त से संबंध रखते हैं यही वार, तिथि तथा दिनांक के संबंध में भी है। वे भी सूर्य, चंद्र की गति पर आश्रित हैं। सारांश यह है कि विक्रम संवत अपने अंग, उपांगों सहित पूर्णत: वैज्ञानिक सत्य पर स्थित है। चैत्र शुल्क प्रतिपदा से नवमी तक नौ दिनों को ही बासंती नवरात्र कहते हैं। वहीं नवरात्रि के मौके पर घरों में घट स्थापना की गई एवं माता की ज्योति जलाई गई।

रामनवमीं पर 108 राम मंदिरों में होंगे भव्य कार्यक्रम*

 विराट हिउस के तहत 6अप्रैल को राम नवमीं पर अंचल के 108 राम मंदिरों में भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भगवान राम के जन्मोत्सव पर दोपहर 12 बजे महा आरती एवं संकीर्तन, बौद्धिक कार्यक्रम रामकथा, वार्ता प्रसंग आदि कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। वहीं 12 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जयंती शक्ति दिवस के रूप में मनाई जाएगी। हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने समस्त हिन्दू समाज से नवरात्रि पर्व एवं भगवान राम के जन्मोत्सव पर होने वाले सभी कार्यक्रमों में हिस्सेदारी करने की अपील की है।

कोई टिप्पणी नहीं