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जीवन के विविध रंगों का प्रतीक है रंग पंचमी उत्सव :कैलाश मंथन

जीवन के विविध रंगों का प्रतीक है रंग पंचमी उत्सव :कैलाश मंथन

अंचल के प्राचीन स्थलों मंदिरों में रंग पंचमी पर  हुई रंगों की बरसात

विभिन्न जातियों संप्रदायों का  भारतीयता के रंग में डूब  जाना ही होली की समरसता -कैलाश मंथन


गुना। आंचल में रंग पंचमी का त्यौहार  उमंग और उल्लास से मनाया गया। विराट हिन्दू उत्सव समिति, चिंतन मंच,  अंतर्राष्ट्रीय पुष्टिमार्गीय वैष्णव परिषद, जनसंवेदना, अंतरराष्ट्रीय गीता प्रचारक संघ, नारी शक्ति ग्रुप के तहत रंग पंचमी पर्व पर रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिले  के प्राचीन केदारनाथ, मालपुर, बजरंगगढ़, बमोरी अंचल सहित अन्य प्रमुख धार्मिक स्थानों पर प्राकृतिक रंगों एवं फूलों से होली खेली गई। ठंडाई वितरण के साथ रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए गए। बमोरी अंचल एवं गुना मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान अंतर्राष्ट्रीय पुष्टिमार्गीय वैष्णवी वैष्णव परिषद मध्य प्रदेश के जिला अध्यक्ष ,विराट हिन्दू उत्सव प्रमुख कैलाश मंथन ने कहा कि भारत में उत्सवों की परंपरा महान है। सनातन धर्म में बसंत पंचमी से लेकर रंग पंचमी तक 45 दिवसीय होली महोत्सव की रंगारंग परंपरा देश को सामाजिक समरसता के एकीकरण का संदेश देती है। होली फाग महोत्सव की पूर्णाहूति करते हुए अंतर्राष्ट्रीय पुष्टिमार्गीय परिषद मध्य प्रदेश के  मीडिया प्रभारी कैलाश मंथन ने वैष्णवों के बीच कहा कि जीवन में प्रत्येक कार्य को प्रभु सेवा समझकर किया जाए। मानव जीवन में होने वाले विभिन्न सुख दुख को समान समझकर जीवन के विविध रंगों को उल्लास पूर्ण तरीके से देखा जाए तो जिंदगी में उत्साह एवं उमंग बना रहेगा। जीवन में रंगों की  विविधता का प्रतीक है रंग पंचमी का पर्व। देश में हजारों जातियां, अनेकों संप्रदाय एवं विभिन्न धर्मो का भारतीयता के रंग में रंगना ही होली महोत्सव की विशेषता है ।इसीलिए सनातन धर्म में होली का त्यौहार लगातार डेढ़ माह तक रंगारंग उत्सव की परंपरा बन चुका है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं नागरिकगण उपस्थित रहे। 

केदारनाथ ,मुहालपुर में हुआ अभिषेक, ठंडाई प्रसादी का वितरण

रंगपंचमी के मौके पर केदारनाथ एवं अन्य धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में विराट हिउस कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का अभिषेक किया एवं प्राकृतिक रंगों का आदान-प्रदान किया। वहीं ठंडाई की प्रसादी का अनेकों स्थानों पर वितरण किया गया। 

करीला पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालु

पड़ोसी जिले अशोकनगर के करीलाधाम में मां जानकी के दर्शन करने श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।  उषा प्रमुख कैलाश मंथन के मुताबिक बार-बार चेतावनी के बावजूद भी बस एवं अन्य यात्री वाहनों द्वारा मनमाना किराया वसूल कर ओवर लोडिंग की गई। 

प्रशासन की सख्ती के बावजूद शराब एवं नशीले पदार्थों का खुलेआम सेवन किया गया। डीजे की तेज आवाज के बीच अश्लीलता एवं फूहड़ता को रोकने में प्रशासन नाकाम रहा।राईयों को शराब पिलाकर नचाया गया। मां जानकी के दरबार में पवित्र परंपरा फूहड अश्लीलता का शिकार होती जा रही है।

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